Thursday, August 13, 2009

पल पल में मेरी मौतें बहुत हैं...


करने को तुमसे बातें बहुत हैं
मगर बांध देते हैं जो मुझे
ऐसे कम्बख़त दायरे बहुत हैं
हर लहज़े में मेरे तुम ही तुम हो
इन आंखों में तुम्हारे सपने बहुत हैं
एक दूजे में हम समा जाएँ मगर
जुदाई में जो कटनी हैं वो रातें बहुत हैं
होनी हैं तुमसे जो छुप छुप कर
चंद लम्हों में सिमटी मुलाकातें बहुत हैं
इनका ही सहारा है इस दीवाने को तुम्हारे
वरना पल पल में मेरी मौतें बहुत हैं

8 comments:

  1. बहुत सुन्दर कृति है

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  2. मनोभावों के दरिया में आप मुझे बहा ले जायेंगे!

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  3. kisi se dillagi ho gayi hai kya? bahut acha likha hai.

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  4. yaar vikas ye panktiya mujhe bht kuch sochne pe majboor karti hai...shayad tum samajh rahe hoge ki main kya soch raha hu...mitr such me tum bahut majboor ho...aur ek tarfa pyar me aisa hi hota hai...aur jab pyar andekha ho to intjaar aur kalpnaye aur bhi sunder ho jaati hain..lekin mitr bahut hi sunder aur ytharthwadi kalpna hai...tum kamaal ho...tum jiyo hazaaro saal.

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